राज़ और रोमांच: अहमदाबाद की शादीशुदा महिलाएं छुप-छुप कर क्यों कर रही हैं डेटिंग?

अहमदाबाद की शहरी महिलाएं और डिजिटल रिश्ते: बदलती सोच और ऑनलाइन कनेक्शन का ट्रेंड

अहमदाबाद आज केवल एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर ही नहीं, बल्कि एक तेज़ी से बदलता हुआ शहरी केंद्र बन चुका है। बढ़ते शॉपिंग मॉल, कैफे कल्चर, और डिजिटल कनेक्टिविटी ने यहां के सामाजिक ढांचे में नए बदलाव लाए हैं। खासकर सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप्स ने लोगों की आपसी बातचीत और रिश्ते बनाने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

इस बदलाव का असर अहमदाबाद की महिलाओं, विशेषकर शादीशुदा महिलाओं पर भी देखा जा रहा है। आधुनिक जीवनशैली, व्यस्त दिनचर्या, और बदलती सोच के बीच, वे अब पहले की तुलना में सोशल प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा सक्रिय हैं और नए तरह के डिजिटल कनेक्शन बना रही हैं।

डिजिटल कनेक्शन का नया दौर

आज के दौर में बातचीत सिर्फ व्यक्तिगत मुलाकातों तक सीमित नहीं है। Facebook, Instagram, और नए‑नए चैटिंग प्लेटफॉर्म्स ने संवाद को 24x7 उपलब्ध बना दिया है।

  • सोशल ऐप्स का इस्तेमाल: कुछ महिलाएं बुक क्लब, फिटनेस ग्रुप, या प्रोफेशनल नेटवर्किंग के लिए ऑनलाइन जुड़ती हैं।
  • नए दोस्त और नेटवर्क: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अलग पृष्ठभूमि और शहरों के लोगों से जुड़ना आसान हुआ है।
  • ऑनलाइन इवेंट्स और ग्रुप गतिविधियां: वर्कशॉप, वेबिनार, और ऑनलाइन कम्युनिटी गतिविधियां अब सामान्य हो गई हैं।

इस बदलाव के पीछे कारण

  1. सामाजिक दायरे का विस्तार ऑनलाइन माध्यम से महिलाएं अपने दोस्ती और जान‑पहचान के दायरे को बढ़ा पा रही हैं।
  2. पर्सनल टाइम और पहचान की खोज परिवार और काम के बीच संतुलन बनाते हुए भी, महिलाएं अपने लिए समय निकालकर डिजिटल स्पेस में सक्रिय हो रही हैं।
  3. विचारों और रुचियों की साझेदारी इंटरनेट के ज़रिए शौक, पढ़ाई, करियर और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर समान सोच रखने वालों से जुड़ना आसान हुआ है।

चुनौतियां और सावधानियां

भले ही ऑनलाइन कनेक्शन का अनुभव अधिकतर मामलों में सकारात्मक होता है, लेकिन इसके साथ कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है।

  • निजी जानकारी की सुरक्षा: पता, बैंक डिटेल्स, और निजी फोटो सिर्फ भरोसेमंद और सही कारण वाले लोगों को ही दें।
  • पहचान की पुष्टि: नए परिचितों की प्रोफाइल, पोस्ट और नेटवर्क को जांचना ज़रूरी है।
  • संतुलन बनाए रखना: वर्चुअल बातचीत और वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन रखना जरूरी है।

अहमदाबाद का बदलता सामाजिक परिदृश्य

  • कैफे कल्चर और मीट‑अप ग्रुप: अहमदाबाद के कई कैफे अब बुक क्लब, आर्ट सेशन, या करियर मीट‑अप का स्थान बन चुके हैं।
  • महिला समुदाय की सक्रियता: शहर में महिलाओं के लिए कई डिजिटल और ऑफलाइन कम्युनिटी ग्रुप बन चुके हैं, जो नेटवर्किंग, फिटनेस, और स्किल डेवलपमेंट पर केंद्रित हैं।
  • तकनीकी अपनापन: स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट ने महिलाओं की डिजिटल भागीदारी को और बढ़ा दिया है।

समाजिक दृष्टिकोण

पुरानी सोच रखने वाले कुछ लोगों के लिए यह बदलाव असहज हो सकता है, लेकिन यह एक वास्तविकता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने महिलाओं की स्वतंत्र सोच और सामाजिक जीवन को नई दिशा दी है। अहमदाबाद इसका एक उदाहरण है, जहां पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक डिजिटल ट्रेंड्स साथ‑साथ चल रहे हैं।

सुरक्षित और संतुलित डिजिटल जीवन के टिप्स

  1. सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी सीमित रखें।
  2. किसी नए व्यक्ति से मिलने से पहले विश्वसनीय व्यक्ति को सूचित करें।
  3. ऑनलाइन समय का सही प्रबंधन करें ताकि वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियां प्रभावित न हों।
  4. डिजिटल मित्रता को सम्मान और ईमानदारी के साथ निभाएं।

निष्कर्ष

अहमदाबाद की महिलाएं, खासकर शादीशुदा महिलाएं, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अपने सामाजिक दायरे को बढ़ा रही हैं और नई‑नई सामाजिक और सांस्कृतिक संभावनाओं की खोज कर रही हैं। यह बदलाव शहर की प्रगतिशीलता और महिलाओं की जागरूकता का संकेत है।

डिजिटल रिश्तों का असली सार है सम्मान, पारदर्शिता और सावधानी। अगर यह तीनों चीजें बरती जाएं, तो ऑनलाइन कनेक्शन न सिर्फ सुरक्षित बल्कि जीवन को समृद्ध बनाने का जरिया बन सकते हैं।

सैय्यारा’ सॉन्ग कॉपी होने के आरोप पर तनिष्क बागची ने किया चौकाने वाला खुलासा

सैय्यारा’ सॉन्ग कॉपी होने के आरोप पर तनिष्क बागची ने किया चौकाने वाला खुलासा – जुबिन नौटियाल से संबंध क्या है?

सैय्यारा गीत को कॉपी बताने पर तनिष्क बागची ने तोड़ी चुप्पी: जुबिन नौटियाल के गाने से जुड़ी सच्चाई सामने आई!

बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और सिंगर तनिष्क बागची हाल ही में अपने लोकप्रिय गीत “सैय्यारा” (Saiyaara) को कॉपी करार दिए जाने वाले आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए सामने आए हैं। सोशल मीडिया और म्यूजिक फैंस के बीच उठे इस विवाद ने काफी तहलका मचा दिया था, जहां कहा गया कि तनिष्क बागची का यह गाना लोकप्रिय सिंगर जुबिन नौटियाल के किसी गीत का क्लोन हो सकता है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

कुछ यूजर्स और संगीत विश्लेषकों ने “सैय्यारा” की धुन और हुकलाइन में जुबिन नौटियाल के गाने के साथ समानताएं बताईं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे कॉपी कहकर ट्रोलिंग शुरू कर दी, जिससे गाना और तनिष्क दोनों की छवि प्रभावित होने लगी।

तनिष्क बागची का जवाब – सच बोले जाने का वक्त आ गया!

तनिष्क ने सोशल मीडिया पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी और इस तरह के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि “सैय्यारा” एक मूल सृजन है और इसमें जुबिन नौटियाल या किसी अन्य कलाकार के गाने की नकल जैसा कोई तत्व नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी म्यूजिक प्रोड्यूसर और कलाकार की रचनात्मकता को बिना जांच-पड़ताल झूठे आरोपों के तहत ठेस पहुंचाना गलत है।

तनिष्क ने यह भी कहा कि बॉलीवुड म्यूजिक की दुनिया इतनी विशाल और विविध है कि थोड़ी-बहुत मेलोडी समानता होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई कॉपी किया गया हो।

जुबिन नौटियाल का क्या है स्टैंड?

अब तक जुबिन नौटियाल की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, फैंस और म्यूजिक कम्युनिटी का मानना है कि दोनों कलाकारों के गाने में मूल संगीत की अपनी अलग छाप और शैली है।

सोशल मीडिया पर फैंस की प्रतिक्रिया

इस मामले में सोशल मीडिया पर हलचल तेज़ है। कुछ लोग तनिष्क बागची के समर्थन में हैं तो कई लोग अब भी शक का माहौल बनाए हुए हैं। म्यूजिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि संगीत की दुनिया में “इनफ्लुएंस” और “इंस्पिरेशन” आम बात है, किंतु कॉपी कहना काफी बड़ी बात है और इसके साक्ष्य होने चाहिए।

क्या “सैय्यारा” सच में जुबिन नौटियाल के गीत से कॉपी है?

  • गीत की तुलना की गई तो: बहस यह है कि कुछ धुनों और बीट्स में समानता हो सकती है, लेकिन ये कॉपी का प्रमाण नहीं।
  • तानिष्क का दावा: सारा म्यूजिक अपनी टीम के साथ ध्यान से और कई रिहर्सल के बाद बनाया गया है।
  • सामाजिक मंचों पर: म्यूजिक को एक स्वतंत्र कला माना जाना चाहिए, जहां सारी संभावनाएं और नया प्रयोग जगह पाता है।

निष्कर्ष

तनिष्क बागची ने स्पष्ट कर दिया है कि “सैय्यारा” गाना पूरी तरह उनकी रचना है और जिस तरह के कॉपी के आरोप लगाए गए, वे बिलकुल गलत हैं। उन्होंने संगीत कलाकारों की रचनाओं का सम्मान करने और बिना ठोस प्रमाण के गलत आरोप न लगाने की अपील की है। अनुचित ट्रोलिंग से बचना और रचनात्मकता को बढ़ावा देना ही भविष्य की दिशा है।

करिश्मा कपूर की सौतन कौन? नंदिता महतानी और संजय कपूर के रिश्ते की जानकारी

करिश्मा कपूर की सौतन कौन हैं? जानिए पूरी कहानी

बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में से एक करिश्मा कपूर की शादी और उनके व्यक्तिगत जीवन को हमेशा से मीडिया की खास मिली है। करिश्मा कपूर की शादी संजय कपूर से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक टिक नहीं पाया और दोनों ने तलाक ले लिया। तलाक के बाद संजय कपूर की पहली पत्नी और करिश्मा कपूर की अक्सर चर्चा में रहने वाली एक प्रमुख शख्सियत बनीं नंदिता महतानी, जिन्हें मेलजोल में “सौतन” के रूप में देखा जाता है।

करिश्मा कपूर की सौतन कौन हैं?

करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर की पहली पत्नी हैं नंदिता महतानी। संजय और नंदिता की शादी भी सफल नहीं रही और उन्होंने 2001 में तलाक ले लिया था। उसके बाद 2003 में संजय कपूर ने करिश्मा कपूर से शादी की। इस पारिवारिक जटिलता के कारण अक्सर करिश्मा कपूर के साथ नंदिता महतानी को “सौतन” की उपाधि दी जाती है। हालांकि, दोनों के बीच सार्वजनिक तौर पर कोई प्रत्यक्ष विवाद की खबरें नहीं आईं, लेकिन मीडिया में उनके रिश्ते को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है।

नंदिता महतानी के बारे में कुछ खास बातें

  • नंदिता महतानी एक प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर हैं और बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटीज के करीबी मानी जाती हैं।
  • उन्होंने अपने स्टाइल और ग्लैमरस अंदाज की वजह से भी खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
  • नंदिता महतानी का बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक करण जौहर से भी करीबी रिश्ता माना जाता है।
  • उन्होंने संजय कपूर के अलावा बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर को भी डेट किया था, जो कि एक चर्चा का विषय रहा।

करिश्मा कपूर और उनकी “सौतन” की पारिवारिक और मीडिया कहानी

करिश्मा कपूर की शादी और तलाक की कहानी में नंदिता महतानी का नाम इसलिए जुड़ा क्योंकि संजय कपूर की पहली पत्नी नंदिता ही थीं। दोनों महिलाओं के बीच कोई बड़ा सार्वजनिक विवाद तो नहीं हुआ है, लेकिन मीडिया ने इस रिश्ते को कई बार अलग-अलग तरीकों से छुआ है।

हाल ही में करिश्मा कपूर के भाई आदर जैन के संगीत समारोह में नंदिता महतानी भी स्टाइलिश अंदाज में पहुंची थीं, जहां लोगों की नजरें न केवल करिश्मा पर बल्कि नंदिता पर भी थीं। यह भी दिखाता है कि ये दोनों अलग-अलग जीवन और परिवार में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

निष्कर्ष

करिश्मा कपूर की सौतन से आशय उनकी पूर्व पति संजय कपूर की पहली पत्नी नंदिता महतानी से है। ये दोनों महिलाएं अलग-अलग समय में संजय कपूर के जीवन का हिस्सा रहीं, लेकिन दोनों का अपने-अपने तरीके से बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री में अलग मुकाम है। उनकी कहानियों को अक्सर मीडिया में जोड़कर देखा जाता है, जिससे इस संबंध में हलचल बनी रहती है।

स्मृति ईरानी ने क्यों दिया क्योंकि सास भी कभी थी सेट पर मिसकैरेज का रिपोर्ट

स्मृति ईरानी ने क्यों दिया क्योंकि सास भी कभी थी सेट पर मिसकैरेज का रिपोर्ट, जानिए पूरी सचाई

"स्मृति ईरानी को 'क्योंकि सास भी कभी थी' सेट पर साबित करना पड़ा मिसकैरेज, वजह सुनकर चौंक जाएंगे आप!"

क्योंकि सास भी कभी थी के सेट पर स्मृति ईरानी को देना पड़ा मिसकैरेज का सबूत, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

टीवी शो "क्योंकि सास भी कभी थी" के आइकॉनिक किरदार तुलसी के रूप में मशहूर स्मृति ईरानी ने हाल ही में अपने एक खास और दर्दनाक अनुभव का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उनका मिसकैरेज हुआ था, उस दौरान शो के मेकर्स को उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ था। उन्हें अपनी असली स्थिति साबित करने के लिए अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट दिखानी पड़ी थी।

स्मृति ईरानी ने राज शमानी के पोडकास्ट में अपनी यह कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे शो के निर्माता दिवंगत रवि चोपड़ा और एकता कपूर के साथ काम कर रही थीं। रवि चोपड़ा ने स्मृति को केवल एक हफ्ते की छुट्टी दी, जबकि एकता कपूर लगातार रोज़ाना एपिसोड के प्रमाणीकरण में व्यस्त थीं।

पर जब प्रोडक्शन टीम को लगा कि स्मृति इस बात को झूठा साबित कर सकती हैं क्योंकि शूटिंग रोकना संभव नहीं था, तो उन्होंने स्नान के बाद हॉस्पिटल रिपोर्ट दिखाई। इस रिपोर्ट ने उनको मजबूर कर दिया कि वे अपनी बात साबित करें और मेकर्स को अपने मिसकैरेज के बारे में यकीन दिलाएं।

एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि अपने बच्चों के जन्म के बाद भी उन्हें शूटिंग पर जल्दी लौटना पड़ता था, क्योंकि शो ऑन-एयर रहता था। इस कड़ी मेहनत और समर्पण ने ही तुलसी के किरदार को टीवी इतिहास में अमर बना दिया।

यह घटना उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण पलों में से एक थी, जो आज भी दर्शकों के लिए प्रेरणादायक है। स्मृति ईरानी की यह कहानी इस बात की गवाही है कि शूटिंग के दौरान कलाकारों की व्यक्तिगत परेशानियां भी कितनी गहरी होती हैं और उन्हें कैसे सहना पड़ता है।

वर्तमान में "क्योंकि सास भी कभी थी" का रीबूट 29 जुलाई 2025 से STAR Plus पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें स्मृति ईरानी फिर से अपनी भूमिका में नजर आ रही हैं। इस शो की वापसी को लेकर फैंस भी काफी उत्साहित हैं।

शाहरुख या सलमान नहीं, ये एक्टर थे पहली बार 1 करोड़ फीस लेने वाले स्टार

शाहरुख या सलमान नहीं बल्कि इस एक्टर को पहली बार ऑफर हुई थी 1 करोड़ रुपये की फीस। यह स्टार कोई और नहीं बल्कि साउथ इंडियन फिल्मों के महानायक चिरंजीवी हैं।

1990 के दशक में जब बॉलीवुड के बड़े सितारे जैसे अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान अपनी फीस लाखों और फिर करोड़ों में ले रहे थे, उसी दौर में चिरंजीवी ने पहली बार एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपयों से भी अधिक की फीस चार्ज कर इतिहास रच दिया था।

उनकी चर्चित फिल्म “आपदबंधवुदु” के लिए उन्हें करीब 1.25 करोड़ रुपये फीस दी गई थी, जो उस वक्त के लिए बहुत बड़ी रकम थी। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में सबसे पहले इतना मोटा फीस पाने वाले अभिनेता का खिताब पाया।

उस समय बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी 90 लाख रुपये तक फीस लेते थे, जबकि चिरंजीवी ने इस आंकड़े को पार कर दिया था। इसके बाद कमल हासन, रजनीकांत जैसे दिग्गज सितारों ने भी अपनी फीस बढ़ाई।

चिरंजीवी ने तेलुगु सिनेमा में अपने अभिनय के दम पर अपनी एक खास जगह बनाई। न केवल साउथ, बल्कि पूरे भारत में अपने एक्शन और ड्रामा से उन्होंने लाखों दिल जीते।

यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर बॉलीवुड अभिनेताओं को भारत में सबसे महंगे माना जाता है, लेकिन चिरंजीवी ने यह साबित किया कि साउथ के स्टार्स भी बड़ी फीस लेने में पीछे नहीं हैं।

इस तरह, शाहरुख खान या सलमान खान से पहले एक करोड़ की फीस लेने वाला पहला भारतीय अभिनेता चिरंजीवी ही थे, जिन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा का नाम पूरे देश में रोशन किया।

IIT से PhD, जापान से MBA: जानें कौन हैं ULLU App के मालिक विभु अग्रवाल, जो बनाते हैं ‘बोल्ड’ फिल्में”

एक हैरान करने वाला विरोधाभास

कल्पना कीजिए एक ऐसे व्यक्ति की जिसने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से इंजीनियरिंग की हो, बिजनेस की दुनिया को समझने के लिए जापान से MBA किया हो, और फिर ज्ञान की अपनी खोज को पूरा करने के लिए अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से PhD की डिग्री हासिल की हो। ऐसे शानदार अकादमिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति से आप क्या करने की उम्मीद करेंगे? शायद किसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी का CEO बनना, या कोई वैज्ञानिक अविष्कार करना।लेकिन अगर हम कहें कि यह प्रोफाइल भारत के सबसे विवादास्पद OTT प्लेटफॉर्म्स में से एक, ULLU App, के संस्थापक की है, तो शायद आप चौंक जाएंगे। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि ULLU App के संस्थापक और CEO, विभु अग्रवाल की असलियत है। उनकी अकादमिक योग्यता और उनके सबसे प्रसिद्ध बिजनेस का कंटेंट, दोनों एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। आइए जानते हैं उनकी इस दिलचस्प और विरोधाभासी कहानी को। 

उनकी शानदार अकादमिक यात्रा

विभु अग्रवाल की शैक्षिक पृष्ठभूमि किसी भी कॉर्पोरेट लीडर के लिए एक सपना हो सकती है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आने वाले विभु ने अपनी मेधा का लोहा मनवाते हुए IIT कानपुर जैसे संस्थान में प्रवेश लिया। इंजीनियरिंग में स्नातक होने के बाद, उन्होंने अपनी व्यावसायिक समझ को तेज करने के लिए जापान का रुख किया और वहाँ से MBA की डिग्री हासिल की। उनकी ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई; उन्होंने रिसर्च के क्षेत्र में कदम रखा और अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से PhD की उपाधि प्राप्त की। यह प्रोफाइल उन्हें अकादमिक दुनिया के शिखर पर स्थापित करता है। 

स्टील के कारोबार से स्क्रीन के ग्लैमर तक का सफर

OTT की दुनिया में कदम रखने से पहले, विभु अग्रवाल एक सफल और पारंपरिक उद्योगपति थे। उन्होंने 1995 में JAYPEECO India Pvt Ltd नाम से एक स्टील प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की थी, जो टीएमटी बार बनाती थी। कई वर्षों तक इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने के बाद, उन्होंने 2018 के आसपास भारत में तेजी से बदल रहे डिजिटल परिदृश्य में एक बड़ा अवसर देखा।यह वह दौर था जब Jio के आने से इंटरनेट डेटा सस्ता हो गया था और भारत का एक बड़ा वर्ग, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों का, मनोरंजन के लिए मोबाइल स्क्रीन की ओर रुख कर रहा था। विभु अग्रवाल ने इसी बाजार की नब्ज को पकड़ा। उन्होंने महसूस किया कि एक बड़ा दर्शक वर्ग ऐसा है जो हिंदी भाषा में बोल्ड और वयस्क विषयों पर आधारित कंटेंट देखना चाहता है, लेकिन बड़े OTT प्लेटफॉर्म्स इस मांग को पूरा नहीं कर रहे थे। इसी अवसर को भुनाने के लिए उन्होंने 2018 में Ullu App लॉन्च किया। 

ULLU का बिजनेस मॉडल: विवाद और कमाई

Ullu का बिजनेस मॉडल बहुत स्पष्ट और आक्रामक था: कम बजट में तेजी से ऐसी वेब सीरीज का निर्माण करना जिनकी कहानी बोल्ड, इरोटिक और सनसनीखेज हो, और इसे एक किफायती सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए दर्शकों तक पहुँचाना। यह रणनीति काम कर गई। ऐप तेजी से लोकप्रिय हुआ, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में।वित्तीय सफलता की बात करें तो, रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में कंपनी ने ₹100 करोड़ से अधिक का राजस्व अर्जित किया, जिसमें ₹15 करोड़ से ज़्यादा का शुद्ध लाभ शामिल था।हालांकि, ULLU की यह सफलता हमेशा विवादों के साये में रही है। इसके कंटेंट पर अक्सर अश्लीलता फैलाने और महिलाओं को गलत तरीके से चित्रित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह प्लेटफॉर्म लगातार सरकारी एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और अदालतों के रडार पर रहा है। इन्हीं विवादों के कारण, इसके भविष्य पर हमेशा रेगुलेटरी कार्रवाई का खतरा बना रहता है। 

एक सिक्के के दो पहलू: 'अतरंगी' और 'हरी ओम' ऐप्स

विभु अग्रवाल की व्यावसायिक समझ केवल ULLU तक सीमित नहीं है। विवादों से होने वाले जोखिम को समझते हुए, उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए कुछ आश्चर्यजनक कदम उठाए हैं। उन्होंने "अतरंगी" नाम से एक जनरल एंटरटेनमेंट ऐप और टीवी चैनल लॉन्च किया, जो सामान्य पारिवारिक शो, फिल्में और धारावाहिक दिखाता है।इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने "हरी ओम" नामक एक भक्ति ऐप भी लॉन्च किया है, जो पूरी तरह से धार्मिक कथाओं, भजनों और आध्यात्मिक कंटेंट पर केंद्रित है। एक तरफ बोल्ड कंटेंट और दूसरी तरफ भक्ति ऐप, यह विभु अग्रवाल के जटिल व्यावसायिक व्यक्तित्व को दर्शाता है। यह उनकी छवि को संतुलित करने की कोशिश भी हो सकती है और एक सुरक्षित, विवाद-मुक्त राजस्व स्रोत बनाने की एक सोची-समझी रणनीति भी। 

निष्कर्ष: एक जटिल और सफल उद्यमी

IIT से PhD, एक सफल स्टील कारोबारी, एक विवादास्पद OTT प्लेटफॉर्म के मालिक, और एक भक्ति ऐप के निर्माता विभु अग्रवाल की पहचान कई परतों में बंटी हुई है। वह एक ऐसे उद्यमी हैं जिन्होंने अकादमिक दुनिया की ऊंचाइयों को भी छुआ है और बाजार के उस कोने से भी मुनाफा कमाया है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।उनकी कहानी भारतीय उद्यमिता का एक जटिल, विरोधाभासी और बेहद सफल अध्याय है। भविष्य में वे विवाद और व्यवसाय के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं, यह देखना भारतीय डिजिटल मीडिया जगत के लिए बहुत दिलचस्प होगा। 

ALTT की प्रतिबद्धता: भरोसेमंद ज्ञान, आपके लिए

इंटरनेट ज्ञान का सागर है, पर हर सीप में मोती नहीं होता। ALTT टीम आपके लिए गोताखोर का काम करती है; हम हज़ारों जानकारियों को खंगालते हैं, तथ्यों की कसौटी पर परखते हैं, और केवल वही अनमोल ज्ञान आप तक लाते हैं जो सच में उपयोगी और विश्वसनीय हो।
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