नाग पंचमी पर तवा क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इस अनोखी परंपरा के पीछे की मान्यताएं

नाग पंचमी का पर्व और एक अनूठी परंपरा

नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और प्राचीन त्योहार है, जिसे हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। साल 2025 में यह पर्व 4 अगस्त को मनाया गया। इस दिन नाग देवताओं की पूजा का विशेष विधान है, और उन्हें दूध अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार के साथ एक बहुत ही अनोखी और सख्ती से पालन की जाने वाली परंपरा जुड़ी है; इस दिन रसोई में लोहे के तवे का इस्तेमाल नहीं किया जाता और उस पर रोटी नहीं बनाई जाती। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या कारण है? आइए, इस मान्यता से जुड़े पौराणिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक रहस्यों को जानते हैं।

 

1. पौराणिक और लोक-मान्यता: तवा है नाग के फन का प्रतीक

इस परंपरा के पीछे सबसे प्रचलित और गहरी मान्यता इसे नाग देवता के स्वरूप से जोड़कर देखती है।

  • ऐसी लोक-मान्यता है कि लोहे का तवा, अपने आकार और स्वरूप में, नाग देवता के फैले हुए फन जैसा प्रतीत होता है।
  • जब तवे को चूल्हे की आग पर रखा जाता है, तो यह प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता के फन को आग पर तपाने या कष्ट देने जैसा माना जाता है।
  • चूंकि नाग पंचमी नागों के सम्मान का दिन है, इसलिए इस दिन कोई भी ऐसा कार्य करने से बचा जाता है जो उन्हें किसी भी रूप में कष्ट पहुंचाए। इसी श्रद्धा भाव के कारण, नाग देवता को प्रसन्न रखने और उनके क्रोध से बचने के लिए लोग तवे का उपयोग नहीं करते।

 

2. ज्योतिषीय मान्यता: तवा और राहु ग्रह का संबंध

इस परंपरा का एक और गहरा पहलू ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा हुआ है।

  • ज्योतिष शास्त्र की कुछ मान्यताओं के अनुसार, तवे का संबंध छाया ग्रह राहु से माना गया है। राहु को अक्सर सर्प के सिर के रूप में भी दर्शाया जाता है।
  • माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन तवे को गर्म करने और उस पर रोटी पकाने से राहु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव सक्रिय हो सकते हैं।
  • इससे परिवार में मानसिक तनाव, कलह, और बनते हुए कार्यों में अड़चनें आने की आशंका रहती है। इसलिए, राहु के अशुभ प्रभावों को शांत रखने और नाग देवता की कृपा पाने के लिए इस दिन तवे के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है।

इस दिन क्या बनाया जाता है? (परंपरागत भोजन)

जब तवे पर रोटी नहीं बनती, तो लोग भोजन के लिए अन्य विकल्प अपनाते हैं। इस दिन आमतौर पर ऐसा भोजन बनाया जाता है जिसे पकाने के लिए तवे की ज़रूरत न हो। लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं:

  • पूरी या कचौरी: इन्हें कड़ाही में तला जाता है।
  • खीर और हलवा: ये मीठे पकवान भगोने या कड़ाही में बनते हैं।
  • उबले हुए व्यंजन: जैसे उबले चने या अन्य सब्जियां।
  • चावल और दाल: इन्हें भी बिना तवे के पकाया जा सकता है।

यह भोजन बनाकर नाग देवता को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

 

निष्कर्ष: आस्था, सम्मान और परंपरा का संगम

नाग पंचमी के दिन तवा रोटी न बनाने की परंपरा केवल एक नियम नहीं, बल्कि यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान, पौराणिक कथाओं में आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के पालन का एक सुंदर संगम है। यह हमें सिखाती है कि हमारे त्योहारों की छोटी-छोटी परंपराएं भी गहरे अर्थ रखती हैं, जो परिवार की सुख-शांति और कल्याण की भावना से जुड़ी होती हैं। इस दिन तवे का उपयोग टालकर, भक्तगण नाग देवता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

 

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है और यह किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता है।