Stock Market Today 30 जुलाई 2025

Stock Market Today: 30 जुलाई 2025 को बाजार की चाल और निवेश के लिए जरूरी जानकारियां

भारतीय शेयर बाजार आज यानी 30 जुलाई 2025 को मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच धीमी शुरुआत कर सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी के लिए दिन की शुरुआत थोड़ी सतर्क बनी रहेगी, खासकर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर 25% तक उच्च टैरिफ की संभावना की धमकी के चलते। इससे बाजार में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है,

आज का भारतीय स्टॉक मार्केट का अपडेट

  • मंगलवार को सेंसेक्स 446.93 अंक की बढ़त के साथ 81,337.95 पर बंद हुआ और निफ्टी 140.20 अंक की तेजी के साथ 24,821.10 पर रहा।
  • हालांकि आज वैश्विक बाजारों में मिले-जुले रुख का असर भारतीय बाजार में दिखने की संभावना है। जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाज़ारों में अलग-अलग दिशा रही है।
  • अमेरिकी बाजार में भी कुछ गिरावट देखी गई, जिससे भारतीय बाजार पर भी अस्थिरता का दबाव है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का आउटफ्लो जारी है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीदारी से नुकसान कम करने में मदद मिलती दिख रही है।

आज किन शेयरों पर रहेगा फोकस?

  • बैंक ऑफ इंडिया ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 32.2% नेट प्रॉफिट ग्रोथ का आंकड़ा दिया है, जिसके कारण इसके शेयर पर नजरें बनी रहेंगी।
  • त्रिवेणी इंजीनियरिंग, पिरामल एंटरप्राइजेज और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के शेयर भी आज सक्रिय रहने की संभावना है।
  • कुछ कंपनियां पावर ग्रिड, हुंडई मोटर इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, टाटा स्टील आदि अपने तिमाही परिणाम आने को लेकर चर्चा में हैं जो बाजार को आगे प्रभावित कर सकते हैं।

बाजार के प्रमुख संकेत और दिशा

  • निफ्टी 24,850 के स्तर को पार करने की कोशिश करेगा लेकिन यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • बाजार में चालू माह के अंत तक IPO, QIP, और SME के माध्यम से मजबूत पूंजी जुटाने की रफ्तार देखी गई है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
  • अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और भारत के मुद्रा विनिमय दर में गिरावट से निवेशकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

निवेशकों के लिए सुझाव

  • बाजार में सतर्कता रखें, खासकर विदेशी निवेशकों के बिकवाली के दौर में।
  • बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स के ट्रेंड पर नजर रखें।
  • अपनी निवेश रणनीति में विविधता बनाए रखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करने पर विचार करें।
  • तिमाही परिणाम आने वाले शेयरों पर ध्यान दें क्योंकि वे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।

निष्कर्ष

30 जुलाई 2025 को भारतीय शेयर बाजार वैश्विक दबावों और घरेलू आर्थिक संकेतों के मिश्रित प्रभाव के चलते सतर्क भाव के साथ खुल सकता है। हालांकि पिछले दिन की अच्छी तेजी से बाजार में खरीदारी की संभावनाएं बनी हैं। निवेशक अपनी रणनीति को पूरी तरह जांच-परख कर बाजार में कदम रखें और प्रमुख कंपनी के तिमाही परिणामों एवं विदेशी निवेश के रुख पर विशेष ध्यान दें।

PM-Kisan Yojana-6000-rupye-kaise-nikale

जानिए कैसे पीएम किसान योजना से छोटे किसानों को मिलती है सालाना ₹6,000 की सीधी मदद!

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan Yojana) के तहत किसानों को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में तीन किस्तों में दी जाती है। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा छोटे और सीमांत किसानों की वित्तीय स्थिति सुधारने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 1 फरवरी 2019 को शुरू की गई थी.

पीएम-किसान योजना से किसानों को सालाना ₹6,000 की मदद कैसे मिलती है?

पात्रता: योजना का लाभ उन किसान परिवारों को मिलता है जिनके पास खेती योग्य भूमि है, और वे छोटे या सीमांत किसान हैं। योजना के तहत पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे एक परिवार के रूप में गिने जाते हैं। किसानों को अपने नाम से कृषि योग्य भूमि का प्रमाण देना होता है।

आर्थिक सहायता: पात्र किसानों को हर साल कुल ₹6,000 की मदद मिलती है, जो तीन समान किश्तों में आती है। प्रत्येक किस्त ₹2,000 की होती है, जो लगभग हर 4 महीने पर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

भुगतान का तरीका (DBT): योजना के तहत वितरण डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से होता है, जिससे पैसे सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता, दक्षता और शीघ्रता सुनिश्चित करती है, तथा कहीं पर भी भ्रष्टाचार की संभावना को कम करती है।

आवेदन प्रक्रिया: किसान स्थानीय पटवारी, राजस्व अधिकारियों, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से या आधिकारिक पीएम-किसान पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में भूमि का प्रमाण, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण इत्यादि आवश्यक होते हैं।

  • पहली किस्त: ₹2,000 (अप्रैल–जुलाई)
  • दूसरी किस्त: ₹2,000 (अगस्त–नवंबर)
  • तीसरी किस्त: ₹2,000 (दिसंबर–मार्च)
यह पूरी प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है और पैसा सीधे किसान के खाते में पहुँचता है।

पैसे का उपयोग: किसानों को सहायता राशि के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वे इसे बीज, खाद, कीटनाशक, खेती के अन्य जरूरी खर्च, या निजी जरूरतों के लिए उपयोग कर सकते हैं। इसका उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और उन्हें साहूकारों के जंजाल से बचाना है।

लाभार्थी पहचान और सत्यापन: राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश पात्र किसानों की पहचान करती हैं और लाभार्थियों की सूची अपडेट करती हैं। गलत डेटा पर योजना का लाभ नहीं मिलता और फर्जी लाभ प्राप्त करने पर कार्यवाही होती है।

पीएम-किसान योजना के फायदे और महत्व

  • किसानों की आय में स्थिरता लाना और आर्थिक मदद प्रदान करना।
  • कृषि से जुड़ी खर्चों में सहायता देना ताकि किसान बेहतर कृषि कर सकें।
  • साहूकारों से सस्ते ब्याज पर लोन उपलब्ध कराना।
  • पूरी देश में लगभग करोड़ों किसानों को सीधी नकदी सहायता।
 

PM-KISAN की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर:

https://pmkisan.gov.inवहाँ आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज़ और बैंक खाते की जानकारी देकर फॉर्म भरना होता है।

कैसे चेक करें पैसा आया या नहीं?

किसान अपने PM-KISAN खाते की स्थिति इस वेबसाइट से देख सकते हैं:https://pmkisan.gov.in/homenew.aspx 

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक प्रभावी वित्तीय सहायता योजना है जो भारत के छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर करती है। यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण पहल है।

जगदीप धनखड़ ने अचानक क्यों दिया इस्तीफा? जानिए सरकारी दबाव और घटनाक्रम की पूरी कहानी

जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया? कैसे और क्यों?

1. त्यागपत्र की प्रक्रिया

21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति बंद अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखित में इस्तीफा भेजा, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को मुख्य वजह बताया और डॉक्टरों की सलाह का हवाला दिया।

इसके बाद राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया और वह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत होता है, जिसमें उपराष्ट्रपति अपने पद से स्वतंत्र रूप से इस्तीफा दे सकते हैं।

2. इस्तीफे के पीछे के स्वास्थ्य कारण

धनखड़ ने बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्होंने इस्तीफा दिया। मार्च और जून 2025 में उनकी सेहत खराब होने की खबरें भी आई थीं। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के अलावा इस निर्णय के पीछे राजनीतिक दबाव की अफवाहें भी थीं।

3. राजनीतिक दबाव और घटनाक्रम

राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार और धनखड़ के बीच मतभेद बढ़ रहे थे। विशेष रूप से, धनखड़ ने विपक्ष के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव का जिक्र किया था, जो सरकार को नागवार गुजरा। इस असहमति के कारण कथित तौर पर उन्हें इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।

सरकार ने उन्हें बताया कि यदि वे इस्तीफा नहीं देंगे, तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके बाद धनखड़ ने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा।

4. इस्तीफे का दिन, घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 21 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन ही यह बदलाव हुआ।
  • धनखड़ ने कई बैठकें कीं लेकिन राजनीतिक स्थिति तनावपूर्ण थी।
  • शाम 7:30 बजे उन्हें बड़े मंत्री द्वारा फोन कर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।
  • करीब 9:25 बजे उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
  • राष्ट्रपति के समक्ष इस्तीफा जमा कराया गया और स्वीकार कर लिया गया।

5. इस्तीफे के बाद की स्थिति

धनखड़ का इस्तीफा भारत के इतिहास में उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्ति के दौरान एक असामान्य कदम था। उपराष्ट्रपति पद वैसे भी संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होता है और उनकी समय से पहले इस्तीफा देने से राजनीति में हलचल मची।

फिलहाल उपसभापति हरिवंश राज्यसभा के सभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, और जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

निष्कर्ष

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वास्थ्य कारण बताकर आया, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक दबाव और केंद्र सरकार के साथ असहमति का भी बड़ा रोल था। यह इस्तीफा भारतीय राजनीति में संवैधानिक पदों के महत्व और राजनीतिक समीकरणों की जटिलता को दर्शाता है।

10 मिनट के मुकाबले में केंद्र ने जगदीप धनखड़ को भेजा इस्तीफे का ‘सेकंड-टू-फाइव’ अल्टीमेटम!

10 मिनट टू 5 पीएम: केंद्र ने कैसे पूरी की जगदीप धनखड़ की डेडलाइन?

परिचय

21 जुलाई 2025 को भारतीय राजनीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव आया जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे का समय और प्रक्रिया खासतौर पर ध्यान देने योग्य रही क्योंकि केंद्र सरकार ने शाम 5 बजे के लगभग डेडलाइन तय की थी, जिसे मिनटों के भीतर पूरा किया गया। इस लेख में हम उस रोचक टाइमलाइन, राजनीतिक दबाव, स्वास्थ्य कारण और केंद्र की रणनीति पर चर्चा करेंगे।

इस्तीफा और डेडलाइन की पृष्ठभूमि

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अचानक, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। उनकी यह घोषणा संसद के मानसून सत्र के पहली दिन हुई, और उनकी पदावधि इससे पहले 2027 अगस्त तक थी। इस्तीफा देने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत हुई, जिसमें उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देते हैं और स्वीकार किए जाने पर वह तुरंत प्रभावी होता है।

केंद्र सरकार ने इस इस्तीफा तुरंत आवश्यक मान्यता दी, और माना जाता है कि शाम 5 बजे तक इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। यह डेडलाइन राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से तय की गई थी ताकि उपराष्ट्रपति पद की रिक्तता को शासन व्यवस्था प्रभावित न करे।

दिन भर की टाइमलाइन: 1 बजे से 5 बजे तक का मंथन

  • दोपहर 12:30 बजे जगदीप धनखड़ की अध्यक्षता में राज्यसभा के व्यापार सलाहकार समिति की बैठक हुई, जिसमें सरकार के महत्वपूर्ण मंत्री और सदस्य उपस्थित थे।
  • दोपहर 4:30 बजे के लिए अगली बैठक टाली गई क्योंकि सरकार का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ था।
  • दोपहर 5 बजे से पहले कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने उपराष्ट्रपति से मुलाकातें कीं। यह माना जा रहा है कि इन वार्तालापों में भविष्य की राजनीति और इस्तीफे पर चर्चा हुई।
  • वहीं, इसी दिन विपक्ष द्वारा उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे उपराष्ट्रपति ने मंजूर किया था, जो केंद्र के राजनीतिक एजेंड़े के खिलाफ माना गया।
  • शाम लगभग 9:25 बजे, धनखड़ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस्तीफे की घोषणा की, जो अब तक से लेकर शाम 5 बजे की डेडलाइन से पहले की सीधी कार्रवाई का परिणाम था।

राजनीतिक दबाव और केंद्र की रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार, उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारण के अलावा गहरे राजनीतिक कारण भी थे। केंद्र सरकार की रणनीति को देखते हुए यह समझा गया कि विपक्ष द्वारा न्यायाधीश के खिलाफ कार्यवाही के बाद केंद्र ने उपराष्ट्रपति को लेकर अपना असंतोष जताया था। एक संभावित अविश्वास प्रस्ताव का डर भी था, जिसे टालने के लिए इस्तीफा लेना जरूरी समझा गया।

केंद्र की ओर से इस डेडलाइन पर कार्रवाई कर इस्तीफे को शीघ्र स्वीकार कर लेने का मकसद उपराष्ट्रपति पद की रिक्ति को लेकर सियासी स्थिरता बनाए रखना तथा आगामी सत्र कार्यों में व्यवधान से बचना था।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला: क्या था सच?

धनखड़ ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का उल्लेख किया। हालांकि, उनकी सक्रियता और दिनभर के कार्यों को देखकर कुछ राजनीतिक जानकार इस तर्क पर संदेह भी जता रहे हैं। परंतु सीवी के अनुसार, उनका यह निर्णय अंततः राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों ही पहलुओं को मिलाकर लिया गया था।

निष्कर्ष: कैसे केंद्र ने डेडलाइन पर बनाया फाइनल फैसला

केंद्र सरकार ने 21 जुलाई के दिन हर स्तर पर तेज़ी से काम करते हुए उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को अपना लिया। राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए रणनीतिक इंतजाम किए गए और डेडलाइन तक यह सुनिश्चित किया गया कि पद खाली होने के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित न हो।

यह घटना भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक पदों की अहमियत, राजनीतिक समीकरण और समय की महत्ता को दर्शाती है।

13 साल बाद निर्देशन की कुर्सी पर लौटे मानव कौल

13 साल बाद निर्देशन की कुर्सी पर लौटे मानव कौल: अपनी किताब से पर्दे पर उड़ाएंगे हिमालयी जादू!

13 साल बाद निर्देशन में मानव कौल की वापसी: यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक साहित्यिक अनुभव होगा!

भारतीय सिनेमा के सबसे संवेदनशील और बहुमुखी कलाकारों में से एक, मानव कौल, 13 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर निर्देशन की कुर्सी पर लौट रहे हैं। लेकिन यह महज़ एक वापसी नहीं है; यह उनकी साहित्यिक आत्मा का पर्दे पर विस्तार है। अपनी प्रशंसित पुस्तक ‘साक्षात्कार’ को आधार बनाकर वह एक ऐसी फिल्म बनाने जा रहे हैं जो व्यावसायिकता की भीड़ से अलग, एक गहरा और व्यक्तिगत अनुभव देने का वादा करती है। आइए इस प्रोजेक्ट का गहन विश्लेषण करें और समझें कि यह हिंदी सिनेमा के लिए क्यों खास है। 

क्या, कौन और कब?

अभिनेता, लेखक और नाट्य निर्देशक मानव कौल ने घोषणा की है कि वह अपनी 2024 में प्रकाशित पुस्तक ‘साक्षात्कार’ पर आधारित एक फिल्म का निर्देशन करेंगे। इस फिल्म की शूटिंग नवंबर 2025 में उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल की कुछ अनछुई खूबसूरत लोकेशनों पर शुरू होगी। फिल्म में मानव कौल स्वयं मुख्य भूमिका में होंगे, और उनके साथ थिएटर और सिनेमा के दिग्गज कलाकार कुमुद मिश्रा और मानसि भवळकर भी नज़र आएंगे। 

13 साल का अंतराल: एक अभिनेता के अनुभव निर्देशक को कैसे गढ़ेंगे?

यह सवाल महत्वपूर्ण है कि इन 13 सालों में क्या बदला? इन सालों में मानव कौल ने एक अभिनेता के तौर पर खुद को तराशा है। "तुम्हारी सुलु" के संवेदनशील पति से लेकर "साइना" के सख्त कोच तक, उन्होंने किरदारों की हर परत को जिया है। यह अनुभव अमूल्य है। एक निर्देशक के लिए अपने कलाकारों की मानसिकता को समझना सबसे ज़रूरी होता है। इन 13 वर्षों के अभिनय ने उन्हें कैमरे के सामने की बारीकियों और एक अभिनेता की ज़रूरतों की गहरी समझ दी है, जो निसंदेह उनके निर्देशन को और भी ज़्यादा परिपक्व और प्रभावशाली बनाएगी। 

पन्नों से पर्दे तक: 'साक्षात्कार' की आत्मा का सिनेमाई रूपांतरण

मानव कौल का लेखन introspective (आत्मनिरीक्षण) और दार्शनिक होता है। उनकी कहानियाँ अक्सर इंसानी रिश्तों, अकेलेपन और अस्तित्व की तलाश के इर्द-गिर्द घूमती हैं। हालांकि 'साक्षात्कार' की कहानी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन यह अनुमान लगाना सुरक्षित है कि फिल्म में हास्य और मनोरंजन के साथ-साथ एक गहरी भावनात्मक परत भी होगी। यह फिल्म महज़ एक कहानी नहीं होगी, बल्कि कौल के साहित्यिक संसार का एक दृश्य प्रतिबिंब होगी, जो उनके पाठकों और गंभीर सिनेमा के प्रेमियों, दोनों के लिए एक ट्रीट होगी। 

हिमालय ही क्यों? सिर्फ एक खूबसूरत लोकेशन से कहीं ज़्यादा

फिल्म की पृष्ठभूमि हिमालय है, और यह चुनाव महज़ संयोग नहीं है। हिंदी सिनेमा में हिमालय हमेशा से सिर्फ एक सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, शांति, और आत्म-खोज का प्रतीक रहा है। इम्तियाज अली की 'रॉकस्टार' से लेकर 'हाईवे' तक, पहाड़ों ने कहानी के चरित्रों की आंतरिक यात्रा को दर्शाया है। मानव कौल की कहानी के लिए हिमालय का परिवेश एकदम सटीक लगता है, जो फिल्म को एक शांत, ताज़ा और वास्तविक एहसास देगा। यह शहर की भागदौड़ से दूर, कहानी को अपनी गति से सांस लेने का मौका देगा। 

इस फिल्म से क्या उम्मीदें हैं?

मानव कौल की यह वापसी उस दौर में हो रही है, जब दर्शक स्टारडम से ज़्यादा अच्छी कहानी को महत्व दे रहे हैं। यह फिल्म पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग, कथानक-प्रधान और सांस्कृतिक रूप से मज़बूत सिनेमा की भूख को शांत कर सकती है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक कलाकार का अपनी जड़ों की ओर लौटना है, जहाँ साहित्य और सिनेमा एक दूसरे से मिलते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि एक लेखक-अभिनेता-निर्देशक की तिकड़ी पर्दे पर क्या जादू बिखेरती है।ALTT के पाठकों के लिए सवाल: क्या आपने मानव कौल की कोई किताब पढ़ी है या उनकी कोई फिल्म देखी है? इस आने वाली फिल्म से आपको क्या उम्मीदें हैं? नीचे कमेंट्स में हमें बताएं!
स्मृति ईरानी ने क्यों दिया क्योंकि सास भी कभी थी सेट पर मिसकैरेज का रिपोर्ट

स्मृति ईरानी ने क्यों दिया क्योंकि सास भी कभी थी सेट पर मिसकैरेज का रिपोर्ट, जानिए पूरी सचाई

"स्मृति ईरानी को 'क्योंकि सास भी कभी थी' सेट पर साबित करना पड़ा मिसकैरेज, वजह सुनकर चौंक जाएंगे आप!"

क्योंकि सास भी कभी थी के सेट पर स्मृति ईरानी को देना पड़ा मिसकैरेज का सबूत, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

टीवी शो "क्योंकि सास भी कभी थी" के आइकॉनिक किरदार तुलसी के रूप में मशहूर स्मृति ईरानी ने हाल ही में अपने एक खास और दर्दनाक अनुभव का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उनका मिसकैरेज हुआ था, उस दौरान शो के मेकर्स को उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ था। उन्हें अपनी असली स्थिति साबित करने के लिए अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट दिखानी पड़ी थी।

स्मृति ईरानी ने राज शमानी के पोडकास्ट में अपनी यह कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे शो के निर्माता दिवंगत रवि चोपड़ा और एकता कपूर के साथ काम कर रही थीं। रवि चोपड़ा ने स्मृति को केवल एक हफ्ते की छुट्टी दी, जबकि एकता कपूर लगातार रोज़ाना एपिसोड के प्रमाणीकरण में व्यस्त थीं।

पर जब प्रोडक्शन टीम को लगा कि स्मृति इस बात को झूठा साबित कर सकती हैं क्योंकि शूटिंग रोकना संभव नहीं था, तो उन्होंने स्नान के बाद हॉस्पिटल रिपोर्ट दिखाई। इस रिपोर्ट ने उनको मजबूर कर दिया कि वे अपनी बात साबित करें और मेकर्स को अपने मिसकैरेज के बारे में यकीन दिलाएं।

एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि अपने बच्चों के जन्म के बाद भी उन्हें शूटिंग पर जल्दी लौटना पड़ता था, क्योंकि शो ऑन-एयर रहता था। इस कड़ी मेहनत और समर्पण ने ही तुलसी के किरदार को टीवी इतिहास में अमर बना दिया।

यह घटना उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण पलों में से एक थी, जो आज भी दर्शकों के लिए प्रेरणादायक है। स्मृति ईरानी की यह कहानी इस बात की गवाही है कि शूटिंग के दौरान कलाकारों की व्यक्तिगत परेशानियां भी कितनी गहरी होती हैं और उन्हें कैसे सहना पड़ता है।

वर्तमान में "क्योंकि सास भी कभी थी" का रीबूट 29 जुलाई 2025 से STAR Plus पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें स्मृति ईरानी फिर से अपनी भूमिका में नजर आ रही हैं। इस शो की वापसी को लेकर फैंस भी काफी उत्साहित हैं।

शाहरुख या सलमान नहीं, ये एक्टर थे पहली बार 1 करोड़ फीस लेने वाले स्टार

शाहरुख या सलमान नहीं बल्कि इस एक्टर को पहली बार ऑफर हुई थी 1 करोड़ रुपये की फीस। यह स्टार कोई और नहीं बल्कि साउथ इंडियन फिल्मों के महानायक चिरंजीवी हैं।

1990 के दशक में जब बॉलीवुड के बड़े सितारे जैसे अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान अपनी फीस लाखों और फिर करोड़ों में ले रहे थे, उसी दौर में चिरंजीवी ने पहली बार एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपयों से भी अधिक की फीस चार्ज कर इतिहास रच दिया था।

उनकी चर्चित फिल्म “आपदबंधवुदु” के लिए उन्हें करीब 1.25 करोड़ रुपये फीस दी गई थी, जो उस वक्त के लिए बहुत बड़ी रकम थी। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में सबसे पहले इतना मोटा फीस पाने वाले अभिनेता का खिताब पाया।

उस समय बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी 90 लाख रुपये तक फीस लेते थे, जबकि चिरंजीवी ने इस आंकड़े को पार कर दिया था। इसके बाद कमल हासन, रजनीकांत जैसे दिग्गज सितारों ने भी अपनी फीस बढ़ाई।

चिरंजीवी ने तेलुगु सिनेमा में अपने अभिनय के दम पर अपनी एक खास जगह बनाई। न केवल साउथ, बल्कि पूरे भारत में अपने एक्शन और ड्रामा से उन्होंने लाखों दिल जीते।

यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर बॉलीवुड अभिनेताओं को भारत में सबसे महंगे माना जाता है, लेकिन चिरंजीवी ने यह साबित किया कि साउथ के स्टार्स भी बड़ी फीस लेने में पीछे नहीं हैं।

इस तरह, शाहरुख खान या सलमान खान से पहले एक करोड़ की फीस लेने वाला पहला भारतीय अभिनेता चिरंजीवी ही थे, जिन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा का नाम पूरे देश में रोशन किया।

नाग पंचमी पर तवा क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इस अनोखी परंपरा के पीछे की मान्यताएं

नाग पंचमी का पर्व और एक अनूठी परंपरा

नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और प्राचीन त्योहार है, जिसे हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। साल 2025 में यह पर्व 4 अगस्त को मनाया गया। इस दिन नाग देवताओं की पूजा का विशेष विधान है, और उन्हें दूध अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार के साथ एक बहुत ही अनोखी और सख्ती से पालन की जाने वाली परंपरा जुड़ी है; इस दिन रसोई में लोहे के तवे का इस्तेमाल नहीं किया जाता और उस पर रोटी नहीं बनाई जाती। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या कारण है? आइए, इस मान्यता से जुड़े पौराणिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक रहस्यों को जानते हैं। 

1. पौराणिक और लोक-मान्यता: तवा है नाग के फन का प्रतीक

इस परंपरा के पीछे सबसे प्रचलित और गहरी मान्यता इसे नाग देवता के स्वरूप से जोड़कर देखती है।
  • ऐसी लोक-मान्यता है कि लोहे का तवा, अपने आकार और स्वरूप में, नाग देवता के फैले हुए फन जैसा प्रतीत होता है।
  • जब तवे को चूल्हे की आग पर रखा जाता है, तो यह प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता के फन को आग पर तपाने या कष्ट देने जैसा माना जाता है।
  • चूंकि नाग पंचमी नागों के सम्मान का दिन है, इसलिए इस दिन कोई भी ऐसा कार्य करने से बचा जाता है जो उन्हें किसी भी रूप में कष्ट पहुंचाए। इसी श्रद्धा भाव के कारण, नाग देवता को प्रसन्न रखने और उनके क्रोध से बचने के लिए लोग तवे का उपयोग नहीं करते।
 

2. ज्योतिषीय मान्यता: तवा और राहु ग्रह का संबंध

इस परंपरा का एक और गहरा पहलू ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा हुआ है।
  • ज्योतिष शास्त्र की कुछ मान्यताओं के अनुसार, तवे का संबंध छाया ग्रह राहु से माना गया है। राहु को अक्सर सर्प के सिर के रूप में भी दर्शाया जाता है।
  • माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन तवे को गर्म करने और उस पर रोटी पकाने से राहु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव सक्रिय हो सकते हैं।
  • इससे परिवार में मानसिक तनाव, कलह, और बनते हुए कार्यों में अड़चनें आने की आशंका रहती है। इसलिए, राहु के अशुभ प्रभावों को शांत रखने और नाग देवता की कृपा पाने के लिए इस दिन तवे के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है।

इस दिन क्या बनाया जाता है? (परंपरागत भोजन)

जब तवे पर रोटी नहीं बनती, तो लोग भोजन के लिए अन्य विकल्प अपनाते हैं। इस दिन आमतौर पर ऐसा भोजन बनाया जाता है जिसे पकाने के लिए तवे की ज़रूरत न हो। लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं:
  • पूरी या कचौरी: इन्हें कड़ाही में तला जाता है।
  • खीर और हलवा: ये मीठे पकवान भगोने या कड़ाही में बनते हैं।
  • उबले हुए व्यंजन: जैसे उबले चने या अन्य सब्जियां।
  • चावल और दाल: इन्हें भी बिना तवे के पकाया जा सकता है।
यह भोजन बनाकर नाग देवता को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। 

निष्कर्ष: आस्था, सम्मान और परंपरा का संगम

नाग पंचमी के दिन तवा रोटी न बनाने की परंपरा केवल एक नियम नहीं, बल्कि यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान, पौराणिक कथाओं में आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के पालन का एक सुंदर संगम है। यह हमें सिखाती है कि हमारे त्योहारों की छोटी-छोटी परंपराएं भी गहरे अर्थ रखती हैं, जो परिवार की सुख-शांति और कल्याण की भावना से जुड़ी होती हैं। इस दिन तवे का उपयोग टालकर, भक्तगण नाग देवता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। 

ALTT की प्रतिबद्धता: भरोसेमंद ज्ञान, आपके लिए

इंटरनेट ज्ञान का सागर है, पर हर सीप में मोती नहीं होता। ALTT टीम आपके लिए गोताखोर का काम करती है; हम हज़ारों जानकारियों को खंगालते हैं, तथ्यों की कसौटी पर परखते हैं, और केवल वही अनमोल ज्ञान आप तक लाते हैं जो सच में उपयोगी और विश्वसनीय हो। info@altt.in 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है और यह किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता है।
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Could 25 Indian OTT Platforms Be Banned by 2025? A Full Analysis of a Possible Future

The Rising Tide of OTT Regulation in India

In a significant shift for India's digital landscape, the era of unregulated online content appears to be drawing to a close. With the explosive growth of Over-The-Top (OTT) platforms, the Ministry of Information and Broadcasting (MIB) has become increasingly active in monitoring and regulating the nature of content being streamed. Recent years have seen numerous warnings, content takedowns, and a clear signal from the government to curb obscenity.This raises a critical question: Could this trend culminate in a massive, nationwide ban on multiple platforms? This analysis explores the hypothetical possibility of a large-scale ban, perhaps by 2025, and examines the reasons, legal frameworks, and potential impact of such a decisive move. 

Why Might Such a Ban Be Implemented? The Potential Reasons

If the government were to take such a drastic step, the primary reasons would likely mirror the complaints and concerns that are already growing louder. The core issues that could trigger a ban would be:
  • Content that is perceived to have little to no credible storyline or social context, focusing primarily on nudity, explicit scenes, and vulgarity.
  • The indecent representation of women, which violates both cultural standards and specific laws.
  • The streaming of material that borders on pornographic elements, presented under the guise of a web series.
  • A significant and growing number of complaints from the public, social organizations, and political bodies regarding the negative impact of such content on children, women, and society at large.
 

Which Platforms Could Be at Risk? A Hypothetical List

If such a sweeping ban were to occur, which platforms might fall under the government's scanner based on current content trends and user complaints? For illustrative and analytical purposes, a list of platforms that often face scrutiny for their "bold" or "spicy" content could potentially include the following: 
  1. ULLU
  2. ALTT (formerly ALTBalaji)
  3. Desiflix
  4. Big Shots App
  5. Boomex
  6. NeonX VIP
  7. Navarasa Lite
  8. Gulab App
  9. Kangan App
  10. Bull App
  11. Jalva App
  12. Wow Entertainment
  13. Look Entertainment
  14. Hitprime
  15. Feneo
  16. ShowX
  17. Sol Talkies
  18. Adda TV
  19. HotX VIP
  20. Hulchul App
  21. MoodX
  22. Fugi
  23. Mojflix
  24. Triflicks
  25. ShowHit
It is important to reiterate that this list is speculative, based on the type of content that has previously attracted government attention and user complaints. 

The Legal Framework for Regulating OTT Content

The government's authority to implement such a ban would stem from several existing legal frameworks that provide the power to regulate digital content. These tools could be invoked to justify a ban:
  • Information Technology Act, 2000 (Sections 67 and 67A): This Act directly addresses the prohibition of publishing or transmitting obscene and sexually explicit material in electronic form.
  • Indecent Representation of Women (Prohibition) Act, 1986: This law prohibits the indecent representation of women through advertisements, publications, writings, paintings, or any other manner.
  • Indian Penal Code (IPC): Various sections of the IPC address offences related to obscenity and public morality.
  • IT Rules, 2021: The Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code lays down a clear framework for content moderation, grievance redressal, and compliance for digital media platforms operating in India. A failure to comply could lead to a loss of "safe harbour" protections and direct legal action.
 

The Potential Government Rationale Behind a Ban

The official rationale from the Ministry of Information and Broadcasting for such a move would likely emphasize the following points:
  • Protecting Societal Values: A primary argument would be the need to uphold Indian cultural and ethical standards in the digital space.
  • Safeguarding Vulnerable Sections: The government would highlight the potential harmful influences of obscene content on the youth and children.
  • Enforcing the Law: It would be framed as a necessary enforcement action against platforms repeatedly violating India’s existing laws.
  • Promoting Responsible Entertainment: The government would stress the need for digital platforms to act responsibly and self-regulate in line with Indian values, fostering a healthy online environment.
 

Potential Impact and Reactions

Such a sweeping ban would be seen as a landmark enforcement of content regulation in the Indian digital ecosystem. The impact would be significant and multifaceted. While many would likely praise it as a necessary step to "clean up" the digital space and protect societal values, it would also spark a fierce debate around freedom of expression, artistic creativity, and the potential for censorship. Digital rights activists and some content creators would likely argue for more nuanced moderation and user-based controls rather than outright bans.Nevertheless, such a move would underscore the Indian government’s seriousness in monitoring digital content and would set a powerful precedent for the future of OTT and app-based entertainment in India. 

A Possible Future for Digital Regulation

While a mass ban on 25 OTT platforms by 2025 remains a hypothetical scenario, the possibility marks a critical point for discussion on the future of digital freedom and regulation in India. The current trajectory of government actions and public discourse suggests that the demand for accountability from OTT platforms will only grow stronger. Whether this leads to stricter self-regulation or a large-scale government crackdown remains to be seen, but it is clear that the Wild West era of Indian digital content is officially over.
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Samsung S24 Ultra Price Drop Alert: Massive Savings on Amazon India in 2025!

For smartphone enthusiasts in NCR, delhi, and across India, here's some electrifying news! The highly acclaimed Samsung Galaxy S24 Ultra, a true titan in the world of premium mobile technology, has witnessed a significant price reduction on Amazon India in 2025. If you've been dreaming of owning this feature-packed flagship, now might be the perfect time to turn that dream into reality without emptying your wallet.

Unbelievable Discount on the Premium Samsung Galaxy S24 Ultra

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Why is the Samsung S24 Ultra Price Lower Now in 2025?

While Samsung hasn't officially announced the reason behind this price adjustment, the trend in the smartphone industry often points towards the arrival of newer models. With the anticipated launch of the Galaxy S25 Ultra on the horizon, this price reduction on the S24 Ultra is a common strategy to clear inventory and make the previous flagship more appealing to budget-conscious consumers. Rest assured, even with a newer model on the way, the Samsung S24 Ultra remains a powerhouse of innovation and performance, boasting features that are still top-of-the-line in 2025.

Why This Price Drop Makes the S24 Ultra a Smart Buy in 2025

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