भारत-पाकिस्तान की हालिया नौसैनिक ड्रिल्स: अरब सागर में नई हलचल
अगस्त 2025 में, भारत और पाकिस्तान की नौसेनाएँ 11-12 तारीख़ को अरब सागर में बेहद करीब सिर्फ 60 नॉटिकल मील की दूरी पर अलग-अलग सैन्य अभ्यास कर रही हैं। हालांकि ऐसे नियमित अभ्यास सामान्य हैं, लेकिन इस बार इनकी समय-सारणी और नजदीकी हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण सुर्खियों में है.
क्या है इस वर्षों का खास घटनाक्रम?
इन ड्रिल्स की पृष्ठभूमि मई 2025 में हुई सैन्य झड़पों से जुड़ी है, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर एयर-स्ट्राइक की थी.
इसके बाद सीमा पर कई बार ड्रोन और मिसाइल टकराव हुए। दोनों तरफ की सेनाएँ हाई अलर्ट पर हैं, नौसैनिक उपस्थिति समुद्री सीमा पर लगातार बढ़ी है.
भारत की नौसेना द्वारा यह अभ्यास गुजरात के पोरबंदर और ओखा तट से सटे क्षेत्र में हो रहा है, वहीं पाकिस्तान की नौसेना ने भी इसी क्षेत्र के करीब सैन्य फायरिंग ड्रिल्स के लिए नोटिस जारी किया है.
रणनीतिक और सुरक्षा महत्व
अरब सागर में इतने समीप सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री प्रभुत्व, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता दर्शाते हैं।
ड्रिल्स के दौरान हर प्रकार के नेविगेशन, मिसाइल फायरिंग और समन्वय अभ्यास होते हैं जिससे नौसैनिक बलों की त्वरित युद्ध क्षमता बढ़ती है।
ऐसे अभ्यास ऑपरेशनल अलर्टनेस और इंटेलिजेंस-गर्दनिंग का भी जरिया हैं, जो संकट के समय तुरंत प्रतिक्रिया देना संभव बनाते हैं.
आस-पास के स्थानीय इलाकों पर असर
अरब सागर के भारत-पाकिस्तान मैरीटाइम फ्रंट के पास समुद्री यातायात पर सीधा असर पड़ा है क्षेत्रीय मछुआरों और व्यापार जहाजों को सतर्कता व वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।
पुलिक/अधिकारियों द्वारा रेड अलर्ट एवं तटीय सतर्कता को और सख्त किया गया है।
हालिया रणनीतिक घटनाओं की झलकियाँ
भारतीय नौसेना हाल में ही स्टील्थ फ्रिगेट्स (INS उदयगिरि, INS हिमगिरी) शामिल कर अपनी शक्ति बढ़ा चुकी है और संयुक्त अभ्यासों में भी सक्रिय है।
भारत में किए गए नौसैनिक अभ्यास अत्याधुनिक मिसाइल, एयर-डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर केंद्रित हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा मजबूत हुई है.
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात के बीच की यह नौसैनिक ड्रिल्स क्षेत्रीय शांति के लिए चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन दोनों समुद्री सेनाओं की तात्कालिक तैयारियों और कूटनीतिक संतुलन का भी प्रतीक हैं। बढ़ती वैश्विक रुचि और सुरक्षा साझेदारों की निगरानी में ये अभ्यास दक्षिण एशियाई समुद्री सुरक्षा के ताजातरीन पहलुओं को उजागर करते हैं।