तूने ज़िंदगी में आके (और फंडिंग लाके) ज़िंदगी बदल दी: लद्दाख के ‘3 इडियट्स’ का असली सच!

shivani
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सादगी का चश्मा या विदेशी स्क्रिप्ट का हिस्सा? लद्दाख के आंदोलनों के पीछे के चेहरों पर एक सवालिया निशान।

तूने ज़िंदगी में आके (और फंडिंग लाके) ज़िंदगी बदल दी…

सुनिए सुनिए , क्या आपको लगता है कि ‘3 इडियट्स’ वाली सादगी और लद्दाख की पहाड़ियां ही काफी थीं? जी नहीं, असली कहानी तो तब शुरू हुई जब 1996 में मिसेस रेबेका नॉर्मन की एंट्री हुई।

बस, उसी पल बैकग्राउंड में वो गाना बजना चाहिए था 😍😍😍 “तूने ज़िंदगी में आके… पूरी स्क्रिप्ट ही बदल दी!”

इसे महज़ “प्यार” मत समझिए, इसे कहिए ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’

जरा क्रोनोलॉजी (Chronology) समझिए:

इत्तेफाक या मास्टरस्ट्रोक?

शादी से पहले सोनम वांगचुक एक साधारण इंजीनियर थे जो बच्चों को पढ़ा रहे थे। लेकिन जैसे ही रेबेका जी (जो कि अमेरिका के SIT – School for International Training से जुड़ी थीं) जीवन में आईं, अचानक सोनम की झोली में इंटरनेशनल अवार्ड्स की बारिश शुरू हो गई।

सोचिए, लद्दाख के एक कोने में बैठे व्यक्ति को अचानक रोलेक्स (Rolex), मैगसायसाय (Magsaysay), और फ्रांस के टेरा अवार्ड कैसे दिखने लगे?

क्या यह सिर्फ़ ‘बर्फ के स्तूप’ (Ice Stupa) का कमाल था, या फिर पीछे कोई और “ताकत” (Deep State) जोर लगा रही थी?

“फॉरन फंडिंग” का वंडरलैंड

लोग कहते हैं “इनोवेशन”। हम कहते हैं FCRA वायलेशन

खबरों की मानें तो एजेंसियां अब जाकर जागी हैं कि सोनम बाबू के NGO (HIAL) में बिना रजिस्ट्रेशन के करोड़ों की विदेशी फंडिंग (Foreign Remittances) कैसे आ रही थी? वो पैसा जो शायद शिक्षा के नाम पर आया, लेकिन इस्तेमाल हुआ “क्रांति” के नाम पर।

रेबेका जी अमेरिका से हैं, और उनके कनेक्शन्स उन संस्थाओं से बताए जाते हैं जो दुनिया भर में “सॉफ्ट पॉवर” (Soft Power) के जरिए सरकारें हिलाने का शौक रखती हैं

जैसे फोर्ड फाउंडेशन (FORD FOUNDATION) या रॉकफेलर (Rockefeller) के तार। तो क्या यह शादी दो दिलों का मिलन थी, या लद्दाख को एक ‘ geopolitical hotspot’ बनाने का प्रोजेक्ट?

“अरब स्प्रिंग” वाली लद्दाखी सर्दी

हाल ही में जब सोनम वांगचुक ने लद्दाख में “अरब स्प्रिंग” (Arab Spring) जैसे प्रोटेस्ट की बात की, तो बिल्ली थैले से बाहर आ गई। एक पर्यावरण प्रेमी (Environmentalist) अचानक से “शासन परिवर्तन” (Regime Change) की भाषा क्यों बोलने लगा?

सीधी बात है जब स्क्रिप्ट विदेश में लिखी गई हो, तो डायलॉग भी वहीं के बोले जाएंगे। रेबेका तो शायद अपना काम करके साइड हो गईं (तलाक के बाद), लेकिन जो “नेटवर्क” सेट किया गया था, वो आज भी एक्टिव है।

भांडाफोड़ निष्कर्ष:

तो भाई, अगली बार जब आप किसी को “सिंपल इनोवेटर” (sidha sada SCIENTIST like RANCHO) समझकर ताली बजाएं, तो एक बार चेक कर लीजियेगा कि उसके पीछे खड़ी “प्रेरणा” कहीं किसी दीर्घकालीन एजेंडे (Deep State Agenda) का हिस्सा तो नहीं?

क्योंकि असली ‘क्लाइमेट चेंज’ तो लद्दाख के मौसम में नहीं, बल्कि वहाँ की राजनीति में लाने की कोशिश की जा रही है और उसका रिमोट कंट्रोल शायद सात समंदर पार था!

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#SonamWangchuk #RebeccaNorman #ForeignFunding #DeepStateIndia #SECMOL #RANCHOEXPOSED

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