क्या भारत में OTT पर लगेगी अब तक की सबसे बड़ी लगाम?
भारत का डिजिटल मनोरंजन जगत एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। पिछले कुछ समय से, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ऑनलाइन कंटेंट, खासकर OTT प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही सामग्री पर अपनी निगरानी बढ़ाई है। अश्लीलता और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कई प्लेटफॉर्म्स को चेतावनियां भी मिली हैं।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है: क्या यह बढ़ती सख्ती भविष्य में एक बड़े राष्ट्रव्यापी बैन का रूप ले सकती है? यह विश्लेषण इसी संभावना की पड़ताल करता है कि क्या भविष्य में, संभवतः 2025 तक, सरकार अश्लीलता पर लगाम कसने के लिए 25 OTT ऐप्स पर बैन जैसा कोई बड़ा कदम उठा सकती है?
ऐसा बैन क्यों लगाया जा सकता है? (संभावित कारण)
यदि सरकार भविष्य में ऐसा कोई कड़ा कदम उठाती है, तो उसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
- अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट: ऐसे प्लेटफॉर्म्स जो बिना किसी सामाजिक संदर्भ या कहानी के केवल नग्नता और अश्लील दृश्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
- महिलाओं का गलत चित्रण: भारतीय कानूनों और सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करते हुए महिलाओं का अशोभनीय चित्रण करना।
- बढ़ती जन-शिकायतें: आम जनता, सामाजिक संगठनों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग जैसी संस्थाओं की ओर से लगातार मिल रही शिकायतें।
कौन से प्लेटफॉर्म्स हो सकते हैं खतरे में? (एक सांकेतिक सूची)
यदि ऐसा कोई बैन होता है, तो वे कौन से प्लेटफॉर्म हो सकते हैं जो जांच के दायरे में आ सकते हैं? सार्वजनिक डोमेन में मौजूद शिकायतों और कंटेंट की प्रकृति के आधार पर, उदाहरण के लिए, निम्न जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की संभावना बन सकती है:
- ULLU
- ALTT
- Desiflix
- Big Shots App
- Boomex
- NeonX VIP
- Navarasa Lite
- Gulab App
- Kangan App
- Bull App
- Jalva App
- Wow Entertainment
- Look Entertainment
- Hitprime
- Feneo
- ShowX
- Sol Talkies
- Adda TV
- HotX VIP
- Hulchul App
- MoodX
- Fugi
- Mojflix
- Triflicks
- ShowHit
कृपया ध्यान दें: यह सूची केवल विश्लेषणात्मक और सांकेतिक है, जो उन प्लेटफॉर्म्स पर आधारित है जिनके कंटेंट को लेकर अक्सर विवाद होता है।
किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?
सरकार के पास डिजिटल कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए कई मज़बूत कानूनी ढाँचे मौजूद हैं, जिनका उपयोग ऐसे किसी भी बैन को लागू करने के लिए किया जा सकता है:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Section 67, 67A)
- इंडसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वूमेन (प्रोहिबिशन) एक्ट, 1986
- भारतीय दंड संहिता (IPC)
- आईटी नियम, 2021 (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड)
निष्कर्ष: डिजिटल मीडिया का भविष्य
हालांकि 25 OTT प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ बैन लगना अभी केवल एक काल्पनिक परिदृश्य है, लेकिन इसकी संभावना भारतीय डिजिटल मनोरंजन के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देती है। यह स्पष्ट है कि सरकार कंटेंट रेगुलेशन को लेकर गंभीर है और प्लेटफॉर्म्स को ज़्यादा जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह कदम डिजिटल स्पेस में एक स्वस्थ और सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत हो सकता है।